Gurukula Patrika

गुरुकुल पत्रिका का लक्ष्य एवं उद्धेश्य (Aim and objectives of Gurukula Patrika)

• गुरुकुल पत्रिका (ISSN- 0976-8017) गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय की त्रैमासिक शोध-पत्रिका है, जो लगभग छः दशकों से भारतीय ज्ञान से मनीषियों एवं सामान्य जनों को आप्लावित कर रही है।

• गुरुकुल पत्रिका गुरुकुल शिक्षा दर्शन, गुरुकुल शिक्षा परम्परा को पोषित, सरंक्षित करने के लिए कृतसंकल्पित है।

• इसमें प्रमुख रूप से वैदिक एवं लौकिक संस्कृत, धर्म, दर्शन, संस्कृति, योग, आयुर्वेद, प्राचीन भारतीय इतिहास, ज्योतिष तथा अन्य प्राच्य-विद्या से सम्बन्धित शोधपरक लेखों का प्रकाशन किया जाता है।

• प्राच्य विद्या, पुरातन ज्ञान- विज्ञान, सांस्कृतिक तत्त्वों एवं साहित्य में निहित जीवन सूत्रों, विज्ञान के मूल तत्त्वों को शोध लेखन के माध्यम से प्रोत्साहित, सरंक्षित करना इस गुरुकुल पत्रिका का मुख्य उद्देश्य है।

• वैदिक ज्ञानविज्ञान में नवीन अनुसन्धानों हेतु युवा शोधार्थियों को भी प्रोत्साहित करने के लिए यह पत्रिका समर्पित है।

सम्पादक मण्डल (Editorial Board)

संरक्षक डॉ0 रामप्रकाश – कुलाधिपति (पदेन), गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार
डॉ0 सुरेन्द्र कुमार– कुलपति (पदेन), गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार
सम्पादक डॉ0 सोहनपाल सिंह आर्य– प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, दर्शनशास्त्र विभाग, गुरुकुल कांगड़ी वि0वि0,हरिद्वार
सह सम्पादक प्रो0 ब्रह्मदेव विद्यालंकार– अध्यक्ष, संस्कृत विभाग, गुरुकुल कांगड़ी वि0वि0, हरिद्वार
प्रो0 रूपकिशोर शास्त्री– वेद विभाग, गु0 कां0 वि0 वि0 हरिद्वार
डॉ0 प्रभात कुमार– प्रो0, प्राचीन भा0 इति0 एवं पुरा0 सं0 विभाग, गुरुकुल कांगड़ी वि0वि0, हरिद्वार
परामर्श प्रो0 ईश्वर भारद्वाज– संकायाध्यक्ष, आयुर्विज्ञान एवं स्वास्थ्य संकाय, गुरुकुल कांगड़ी वि0वि0, हरिद्वार
– अध्यक्ष, योग एवं मानव चेतना विज्ञान विभाग, गुरुकुल कांगड़ी वि0वि0, हरिद्वार
प्रकाशक प्रो0 विनोद कुमार– कुलसचिव, गुरुकुल कांगड़ी वि0वि0, हरिद्वार
व्यवसाय प्रबन्धक पुस्तकालयाध्यक्ष– गुरुकुल कांगड़ी वि0वि0, हरिद्वार
वित्त प्रबन्धक श्री आर0 के0 मिश्रा– वित्ताधिकारी, गुरुकुल कांगड़ी वि0वि0, हरिद्वार

शोध पत्र विषयक दिशा-निर्देश (Author Instructions)

• गुरुकुल पत्रिका गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय की त्रैमासिक शोध पत्रिका है। यह मार्च, जून, सितम्बर तथा दिसम्बर माह में प्रकाशित की जाती है।

• गुरुकुल पत्रिका में वैदिक एवं लौकिक संस्कृत, धर्म, दर्शन, संस्कृति, योग, आयुर्वेद, ज्योतिष, प्राचीन भारतीय इतिहास तथा अन्य प्राच्य विद्या से सम्बन्धित शोध-पत्र प्रकाशन हेतु कभी भी सम्पादक को प्रेषित किये जा सकते हैं।

• अन्धविश्वास को बढ़ावा देने वाले निबन्धों को प्रकाशित करना सम्भव नहीं हो सकेगा, अतः अन्धविश्वास का समर्थन करने वाले निबन्ध कृपया न भेजें।

• गुरुकुल पत्रिका में प्रकाशन हेतु शोध निबन्ध की टंकित मूलप्रति प्रेषित करें, पी॰ डी॰ एफ॰ फ़ाइल, फोटो- स्टेट प्रति स्वीकार्य नहीं होगी। साथ ही हस्तलिखित लेख भी स्वीकार नहीं होंगे। अतः विद्वानों से अनुरोध है कि निबन्ध की मूलप्रति टंकण के उपरान्त शोधन करके लेख प्रेषित करें। जिससे लेख को शुद्धतम रूप में प्रकाशित कराया जा सके।

• शोध निबन्ध में शोध लेखक का निष्कर्ष सुसंगत, प्रामाणिक एवं तथ्यों पर आधारित तथा परम्परा से पोषित होना चाहिए। साथ ही उनमें अपने कथन या निष्कर्ष को पुष्ट करने के लिए न्यूनतम २० प्रमाण देने आवश्यक हैं।

• मनीषी विद्वानों से आग्रह है कि वे अपना निबन्ध माइक्रोसॉफ़्ट वर्ड डॉक्यूमेंट में टाइप करायें और पाद टिप्पणी (फुटनोट) को डालने के लिए superscript का प्रयोग न कर उसे ALT+CTRL+F के माध्यम से डालें। इस प्रकार फुटनोट डालने में त्रुटि की संभावना नहीं रहती है।

• टंकण कराते समय यह ध्यान रखना अपेक्षित है की निबन्ध माइक्रोसॉफ़्ट वर्ड डॉक्यूमेंट (A-4 साइज़) में यूनिकोड फॉन्ट (Kokila) साइज 14 में टाइप कराया जाए। टंकण के उपरान्त, शोधन करके ई-मेल से प्रेषित करें। ई-मेल का पता निम्न है : [email protected] मो0 नं0- 09897273663, 07300761267

• ईमेल के साथ- साथ लेखक को अपने शोध पत्र की हार्ड कॉपी प्रेषित करना भी आवश्यक है, जिससे मूल्याङ्कन के लिए शोध लेख प्रेषित किया जा सके।

• शोध पत्र प्रेषण के साथ इस आशय का प्रमाण पत्र भी प्रेषित करें कि यह लेखक का अपना स्वयं का मौलिक कार्य है। इसमें दी गई सामग्री के प्रति मेरा पूर्ण उत्तरदायित्व है। यह शोध पत्र अन्यत्र प्रकाशनार्थ नहीं भेजा गया है। शोध पत्र से संबन्धित भविष्य में किसी प्रकार के होने वाले वाद-विवाद के लिए मैं पूरी तरह जिम्मेदार हूँ। साथ ही लेखक द्वारा अपना दूरभाष न॰, ई-मेल तथा पत्र व्यवहार का पूर्ण पता लिखा जाना अनिवार्य है।

पुनर्विलोकन (Peer-Review policy)

• गुरुकुल पत्रिका में शोधपत्र मूल्याङ्कन कराने के पश्चात् प्रकाशित कराये जाते हैं। अतः विद्वान् लेखकों से अनुरोध है कि वे वही शोधपत्र इस पत्रिका के लिए प्रेषित करें, जो सब प्रकार से शोध की कसौटी पर खरे हों।

• शोध निबन्ध मौलिक होना चाहिए किसी अन्य विद्वान् की पुस्तक अथवा निबन्ध की नकल करके शोधपत्र भेजना बौद्धिक अपराध तथा अपनी प्रतिभा का हनन है।

• गुरुकुल पत्रिका में केवल शोध निबन्ध ही प्रकाशित किए जाते हैं। जिनमें शोध-प्रविधि का प्रयोग नहीं किया गया है, ऐसे लेखों को प्रकाशित करना सम्भव नहीं होगा।

• किसी अन्य पत्रिका में पूर्व प्रकाशित निबन्ध को पुनः प्रकाशित करने के लिए न भेजें।

परीक्षकत्व

प्राप्त शोधपत्रों को बाह्य परीक्षकों के पास मूल्याङ्कन हेतु प्रेषित किया जाता है तथा उनके द्वारा मूल्यांकित/ निर्दिष्ट संशोधनों के आधार पर ही प्रकाशनार्थ स्वीकार किया जाता है।

संपर्क सूत्र (Contact)

डॉ0 सोहनपाल सिंह आर्य
संपादक, गुरुकुल पत्रिका
प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, दर्शनशास्त्र विभाग
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार
E-Mail- [email protected]
मो0 नं0- 09897273663, 07300761267

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