Research-Articles

शोध-निबन्ध (Reserch-Articles)

प्रो. ज्ञानप्रकाश शास्त्री

क्र. सं. निबन्ध का नाम पत्रिका अंक एवं वर्ष पृष्ठ संख्या ISSN No.
1. भारवि के काव्य में राजनीति प्राच्य प्रज्ञा, अंक 13, सन् 1982, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़ अंक 13, सन् 1982,    
2. वैदिक सर्गविद्या Applied sciences in Sanskrit Litrature, 1999, भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा सन् 1999    
3. सरण्यु आख्यान का आधिदैविक स्वरूप वेद और निरुक्त विशेषांक, अन्तार्राष्ट्रीय दयानन्द वेदपीठ रिसर्च जनरल, 2001 परोपकारिणी सभा, अजमेर. सन् 2001    
4. वेद प्रतिपादित शिक्षा का स्वरूप और महर्षि दयानन्द। गुरुकुल-शिक्षादर्शन, 2003 गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार सन् 2003 56-86  
5. वेद में वाहन-विज्ञान और अश्व गुरुकुल शोधभारती अंक प्रथम, मार्च 2004 गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार अंक प्रथम, मार्च 2004 26-32 0974-8830
6. वैदिक अग्निहोत्र और ब्रह्माण्ड गुरुकुल शोधभारती अंक द्वितीय, 2004 गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार सन् 2004 1-5 0974-8830
7. धर्मादर्थश्च कामश्च गुरुकुल पत्रिका, अंक जनवरी-अप्रैल 2004 गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार अंक जनवरी-अप्रैल सन् 2004    
8. ब्रह्माण्ड का मूल अग्नि प्राच्य मंजूषा, मार्च 2005
पं0बेजनाथ शर्मा, प्राच्य विद्या शोधसंस्थान, हाथरस
सन्2005    
9. ब्राह्मणसाहित्य में अध्यात्म। गुरुकुल शोधभारती अंक-तृतीय, मार्च 2005
गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार
अंक-तृतीय, मार्च2005 1-10 0974-8830
10. आचार्य यास्क के मत में शब्द का स्वरूप। गुरुकुल शोधभारती अंक-चतुर्थ, 2005
गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार
अंक-चतुर्थ, 2005 1-9 0974-8830
11. मुक्ति में जीव की स्थिति गुरुकुल शोधभारती अंक-पञ्चम, 2006
गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार
मार्च2006 1-9 0974-8830
12. वेद के आलोक में राम की राजनीति का आलोच्य पक्ष गुरुकुल शोधभारती, अंक षष्ठ, सितम्बर 2006 गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार सितम्बर
2006
1-9 0974-8830
13. सांख्यदर्शन की वेदमूलकता गुरुकुल शोधभारती, अंक-सप्तम, मार्च 2007 गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार मार्च2007 1-11 0974-8830
14. जातिप्रथा के उन्मूलन में वैदिक शिक्षाव्यवस्था की भूमिका प्राच्यविद्यानुसन्धानम्, अंक- 2, क्रमांक-1 वर्ष जून 2007, मेरठ जनवरी-जून2007 5-12 0974-5866
15. अथर्ववेद में सामान्य यज्ञ का स्वरूप गुरुकुल शोधभारती अंक-अष्टम, 2007
गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार
सितम्बर
2007
1-3 0974-8830
16. अनादिष्टदेवताक मत्रों में देवताज्ञान प्राच्यविद्यानुसन्धानम्, अंक-2, क्रमांक-2, दिसम्बर 2007, मेरठ दिसम्बर
2007
5-12 0974-5866
17. निघण्टुकार और निरुक्तकारः दो भिन्न व्यक्तित्व गुरुकुल शोधभारती अंक-नवम, 2008
गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार
मार्च
2008
1-8 0974-8830
18. यास्क और दयानन्द की दृष्टि में ऋषि गुरुकुल शोधभारती अंक-दशम, 2008
गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार
सितम्बर2008 1-6 0974-8830
19. विश्वशान्ति का वैदिक दर्शन गुरुकुल शोधभारती अंक-एकादश, 2009
गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार
मार्च
2009
1-8 0974-8830
20. यास्कीय निरुक्त का आकार गुरुकुल शोधभारती अंक-द्वादश, 2009 गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार सितम्बर 2009 1-10 0974-8830
21. वैदिक साहित्य में जलीय पारिस्थितिकी और मत्स्य प्राच्यविद्यानुसन्धानम्, अंक-4, जन-जून 2009, मेरठ जनवरी-जून 2009 29-34 0974-5866
22. ऐकपदिक पदों की निर्वचनशैली गुरुकुल शोधभारती अंक-त्रयोदश, 2010 गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार मार्च 2010 1-5 0974-8830
23. निघण्टु में परिगणित हरितः और हरी इन्द्रस्य पदों का विवेचन प्राच्यविद्यानुसन्धानम्, अंक-2, क्रमांक-2, दिसम्बर 2007, मेरठ जनवरी-जून 2010 120-124 0974-5866
24. महर्षि दयानन्दकृत वेदभाष्य का वैशिष्ट्य एवं उसके अध्ययन की विधि गुरुकुल शोधभारती अंक-चतुर्दश, 2010
गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार
अंक 14सितम्बर2010 1-7 0974-8830
25. निरुक्त भाष्यकार आचार्य स्कन्द और उनका काल गुरुकुल शोधभारती अंक-पञ्चदश, 2011 गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार अंक 15मार्च 2011 1-10 0974-8830
26. वैदिक साहित्य में प्रजापति का स्वरूप वेदविद्या, महर्षि सान्दीपनि राष्ट्रिय वेदविद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन अंक 16, 2011 48-59 2230-8962
27. अयं मे हस्तो भगवान् गुरुकुल शोधभारती अंक-षोडश, 2011 गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार अंक17, सितम्बर
2011
1-10 0974-8830
28. वैदिकसाहित्ये दैव्यापदाप्रबन्धनम् वेदविद्या, महर्षि सान्दीपनि राष्ट्रिय वेदविद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन अंक 18, 2012 1-8 2230-8962
29. वाल्मीकि-रामायण में अश्वमेध यज्ञ का स्वरूप गुरुकुल शोधभारती अंक-सप्तदश, 2012 गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार मार्च अंक 17, 2012 6-11 0974-8830
30. अग्निर्वै सर्वा देवताः वैदिक ज्योति, गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार प्रथम अंक, जुलाई-दिसम्बर 2011 105-110 2277-4351
31. गीता और सामर्पणभाष्य में देवयज्ञ का स्वरूप पावमानी, स्वामी समर्पणानन्द वैदिक शोधसंस्थान, गुरुकुल प्रभात आश्रम, मेरठ 2229-6328 33-46 2229-6328
32. वेदप्रतिपादित सकारात्मक चिन्तन और उसकी प्रासंगिकता गुरुकुल शोधभारती अंक-सप्तदश, 2012 गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार अंक 18, सितम्बर
2012
1-10 0974-8830
33. सप्त ऋषयः वेदों को विश्व की देन, डी.ए.वी.कालेज, अमृतसर जून 2012 69-87 978-81910381-1-8
34. यजुर्वेद के प्रथमार्ध में देवी रूपा सरस्वती का स्वरूप पावमानी, स्वामी समर्पणानन्द वैदिक शोधसंस्थान, गुरुकुल प्रभात आश्रम, मेरठ 2229-6328   2229-6328
35. संस्कृति का प्रथम आलेख गुरुकुल शोधभारती 2013 गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार अंक 19, मार्च
2013
1-11 0974-8830
36. अथर्ववेदीय पर्यावरणविज्ञान वेदविद्या, अंक 22, जुलाई दिसम्बर 2013 अंक 22, जुलाई दिसम्बर 2013 66-76 2230-8962
37. वैदिक शब्दार्थ विचार और आचार्य रामनाथ वेदालंकार की मन्त्रार्थदृष्टि गुरुकुल शोधभारती 2013 गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार अंक 20, सितम्बर
2013
13-33 0974-8830
38. आचार्य वेंकटमाधव की दृष्टि में मन्त्रार्थ के लिये स्वर की उपयोगिता गुरुकुल शोधभारती 2014 गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार अंक 21, मार्च
2013
1-5 0974-8830
39. महर्षि दयानन्द के यजुर्वेदभाष्य में यज्ञ का स्वरूप गुरुकुल शोधभारती 2014 गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार अंक 22, सितम्बर
2014
1-12 0974-8830
40. वैदिक साहित्य में त्रैतवाद का स्वरूप गुरुकुल शोधभारती 2014 गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार अंक 23, सितम्बर
2014
1-23 0974-8830
41. वेदभाष्यकारों की दृष्टि में मन्त्रार्थ के उपकरण वेदविद्या, महर्षि सान्दीपनि राष्ट्रिय वेदविद्या प्रतिष्ठानम्, उज्जयिनी अंक 24, जुलाई दिसम्बर 2014 58-83 2230-8962

प्रो. सत्यदेव निगमालंकार

क्रम
सं0

शीर्षक

पत्रिका, पता, वर्ष एवं पृष्ठ संख्या

(क) संस्कृतभाषा में प्रकाशित

कुलभूमिगौरवम्, भारतोदयः, सचित्रं मासिकं, सम्पादकः-डॉ0 हरिगोपाल शास्त्री, पृ0 18-20, गुरुकुल महाविद्यालयः ज्वालापुर, 1993
कुलभूमि गौरवम् गुरुकुल पत्रिका, (मासिक शोध पत्रिका), सम्पादक-डॉ0 जयदेव वेदालंकार, पृ0 108-114, प्रकाशक-गु0 का0 वि0 वि0, हरिद्वार, अप्रैल-सितम्बर 1993
श्रुतिलहरी भारतोदयः, गुरुकुल महाविद्यालय ज्वालापुर, कुल पृष्ठ सं0 5, सन् 1994,
वैदिक पर्यावरण विज्ञानम् भारतोदयः, गुरुकुल महाविद्यालय, ज्वालापुर, जून 1998, पृ0 11-14,
उपनिषदां महत्त्वं संख्या च, वेदवाणी, ग्राम रेवली, शाहपुरतुर्क, सोनीपत, दिसम्बर 1999, पृ0 28-30,
धन्यास्ते जयचन्द्र विद्यालङ्काराः, गुरुकुल पत्रिका, गु0कां0वि0 विश्वविद्यालय, पं0 जयचन्द्र विद्यालंकार अंक, मार्च-जून 1999, पृ0 40-41,
7 वैदिकशासन व्यवस्था भारतोदयः गुरुकुल महाविद्यालय ज्वालापुर, फरवरी 2006, पृ0 8-10
8 नववर्षीया मङ्गलकामना, वेदवाणी, ग्राम रेवली, शाहपुरतुर्क, सोनीपत, अप्रैल 2006, पृ0 11-12
9 उपनिषदां महत्त्वं संख्या च, भारतोदयः, गुरुकुल महाविद्यालय ज्वालापुर, अक्टूबर 2006, पृ0 4-6,
10 वैदिक पर्यावरण विज्ञानम्, आदर्शः, सम्पादक-डॉ0 भोला झाः, प्रकाशन स्थल- श्री भगवान दास संस्कृत महाविद्यालय, हरिद्वार, अक्टूबर 2006, पृ0 70-75,
11 वेदेषु शल्यचिकित्सा, भारतोदयः, गुरुकुल महाविद्यालय, ज्वालापुर,
12 महर्षिदयानन्दीयाशिक्षापद्धतिस्महत्त्वञ्च आन्वीक्षिकी, उत्तराखण्ड संस्कृत अकादमी, हरिद्वार
13  वेदेषु शल्यचिकित्सा आन्वीक्षिकी, उत्तराखण्ड संस्कृत अकादमी, हरिद्वार
14  उपनिषत्सुयोगतत्त्वम् प्रकाशनार्थ दिल्ली संस्कृत अकादमी, नई दिल्ली।
(ख) राष्ट्रभाषा हिन्दी में प्रकाशित
15  आधुनिक पर्यावरण समस्याः वैदिक समाधान पावमानी, त्रैमासिक पत्रिका, प्रकाशक-स्वामी समर्पणानन्द वैदिक शोध संस्थान, गुरुकुल प्रभात आश्रम, (टीकरी) भोला, मेरठ (250501), सम्पादक-स्वामी विवेकानन्द, जुलाई-सितम्बर 1990 पृ0 85-92,
16  वाल्मीकि रामायण मे भरत-चरित्र : एक परिशीलन पावमानी, वैदिक यन्त्रालय, अजमेर, पृ0 48-61, सन् 1991,
17  वैदिक सोम का महत्त्व गुरुकुल पत्रिका, (मासिक शोध पत्रिका), सम्पादक-डॉ0 जयदेव वेदालंकार प्रकाशक-गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार, अक्टूबर-दिसम्बर 1993, पृ0 42-48,
18  वाल्मीकि रामायण में भरत-चरित्र का परिशीलन परोपकारी, पृ0 59-64, सम्पादक-प्रो0 धर्मवीर, प्रकाशक-परोपकारिणी सभा, केसरगंज, अजमेर, फरवरी 1995
19  ऋग्वेद में प्रयुक्त ‘वृतु’ धातु का अर्थानुसन्धान वेदवाणी, ग्राम रेवली, शाहपुरतुर्क, सोनीपत, पृ0 12-15, फरवरी 1998
20  ए मानव, तू वेद का स्वाध्याय कर परोपकारी, वैदिक यन्त्रालय, अजमेर, मार्च 1998, पृ0 114-115,
21  ऋग्वेद में प्रयुक्त ‘इवि’ धातु का अर्थ विचार वेदवाणी, ग्राम रेवली, शाहपुरतुर्क, सोनीपत, जून 1998, पृ0 23-26 त्रमशः जौलाई 1998, पृ0 13-17 तक,
22  धर्म के परम आदर्श मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम गुरुकुल पत्रिका, गु0कां0वि0 विश्वविद्यालय, (मासिक शोध पत्रिका), पृ0 22-27, सन्-1998,
23  ऋग्वेद में ‘ईष’ धातु के प्रयोग वेदवाणी, ग्राम रेवली, शाहपुरतुर्क, सोनीपत, अक्टूबर 1998, पृ0 20-23
24  ऋग्वेद में गत्यर्थक ‘ऋ’ धातुओं के प्रयोग वेदवाणी, (वेद-परिशीलन विशेषाङ्क, ) ग्राम रेवली, शाहपुरतुर्क, सोनीपत, नवम्बर 1998, पृ0 224-228
25  वैदिक आलोक में समर्पण गीता भाष्य परोपकारी, वैदिक यन्त्रालय, अजमेर, सितम्बर 1998, पृ0 336-341,
26  पर्यावरण समस्या का वैदिक समाधान परोपकारी, वैदिक यन्त्रालय, अजमेर, पृ0 425 से 427 त्रमशः, नवम्बर 1998, दिसम्बर 1998, पृ0 453 से 554,
27 साधक, साधना और साध्य शारीर स्तम्भ एवं सिद्धयोग, प्रकाशक-यौगिक शोध संस्थान, योग धाम ज्वालापुर हरिद्वार, पृ0 29 से 38, सन् 1999
28  ऋग्वेद में गत्यर्थक ‘ईवि’ धातु के प्रयोग वेदवाणी, ग्राम रेवली, शाहपुरतुर्क, सोनीपत, जून 1999, पृ0 15-17,
29  ऋग्वेद में ‘वह’ धातु के प्रयोग गुरुकुल पत्रिका, (मासिक शोध पत्रिका) वेद विशेषांक, गु0कां0वि0 विश्वविद्यालय, जुलाई-अक्टूबर 1999, सम्पादक-प्रो0 महावीर, पृ0 102-104,
30 वेदार्थ के उद्धारकः महर्षि दयानन्द सर्वहितकारी, आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा, 29 सितम्बर 1999, He=07
31 कविवर वाल्मीकि और उनका रामायण महाकाव्य सर्वहितकारी, आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा, 28 दिसम्बर 1999, पृ0 8
32  राजनीति में धर्म का स्थानः वैदिक दृष्टिकोण गुरुकुल पत्रिका, गु0कां0वि0 विश्वविद्यालय, नवम्बर-दिसम्बर 1998, जनवरी-फरवरी 1999, पृ0 92-95,
33  ऋग्वेद में युज्यति तथा युज्यते आख्यातों का अर्थान्वेषण स्मारिका, आर्यसमाज-9, पंचकूला, 1999, पृ0 68-71,
34  ऋग्वेद में गत्यर्थक ‘इष’ धातु के प्रयोग गुरुकुल पत्रिका, गु0कां0वि0 विश्वविद्यालय, पृ0 48-52, फरवरी-मार्च, 2000,
35  गोपथब्राह्मण में ब्रह्मचारी के कर्त्तव्य और उसकी महिमा गुरुकुल पत्रिका, गु0कां0वि0 विश्वविद्यालय, पृ0 58-60, अप्रैल-जून 2000,
36  ऋग्वेद में प्रयुक्त ‘अव’ धातु का अर्थानुसन्धान शोध-पत्रिका, अन्तर्राष्ट्रीय दयानन्द वेद पीठ, नई दिल्ली, मुख्यसम्पादक-प्रो0वाचस्पति उपाध्याय, जून 2000, पृ0 56-65,
37  ऋग्वेदगत ‘रथर्य’ धातु का अर्थज्ञान वेदवाणी, ग्राम रेवली, शाहपुरतुर्क, सोनीपत, जुलाई 2000, पृ0 27-28,
38  स्वरवर्णोपदेशक शास्त्र शिक्षा वेदवाणी, ग्राम रेवली, शाहपुरतुर्क, सोनीपत, पृ0 23-27 नवम्बर 2000
39  यास्कीय निरुक्त में पदार्थ-चिन्तन गुरुकुल पत्रिका, गु0कां0वि0 विश्वविद्यालय, दिसम्बर 2001- 2002, पृ0 50-54
40  यास्कीय निरुक्त में पदार्थ-चिन्तन वेदवाणी, ग्राम रेवली, शाहपुरतुर्क, सोनीपत, मार्च 2002, पृ0 7-11,
41  आचार्यः वैदिक दृष्टिकोण गुरुकुल पत्रिका, गु0कां0वि0 विश्वविद्यालय, जनवरी-अप्रैल 2003, पृ0 46-48,
42  ऋग्वेद में ‘अज’ धातु के प्रयोग गुरुकुल पत्रिका, जुलाई-सितम्बर 2003, सम्पादक-प्रो0 ज्ञानप्रकाश शास्त्री, अध्यक्ष एवं निदेशक, श्रद्धानन्द वैदिक शोध संस्थान, पृ0 13-19,
43  देव अथवा देवता-एक विवेचनात्मक अध्ययन वेदवाणी, ग्राम रेवली, शाहपुरतुर्क, सोनीपत, वैदिक देवता विशेषाङ्क, नवम्बर 2003, पृ0 86-90,
44  वैदिक रहस्य, स्मारिका, आर्य समाज सैक्टर, पंचकूला, नवम्बर 2003, पृ0 108-112,
45  यास्क के स्मृत नैरुक्त एवं उनके सिद्धान्त निःश्रेयस, हीरकजयन्ती स्मारिका, आर्यवानप्रस्थ आश्रम, ज्वालापुर -249407, सन् 2003, पृ0 170-172,
46  वैदिक ओजस्वी जीवन गुरुकुल पत्रिका, गु0कां0वि0 विश्वविद्यालय, नवम्बर-सितम्बर 2004–2005, पृ0 46-50,
47  ऋग्वेद की ‘अद्’ धातु का अर्थ विचार गुरुकुल शोध भारती, प्रथम अङ्क 2004, सम्पादक-प्रो0 ज्ञानप्रकाश शास्त्री, अध्यक्ष, श्रद्धानन्द वैदिक शोध संस्थान, गु0कां0वि0वि0, हरिद्वार, पृ0 41-43,
48  अध्वरीय तथा अर्ह विश्लेषण गुरुकुल पत्रिका, सम्पादक-डॉ0 महावीर प्रोपेसर संस्कृत विभाग, गु0कां0वि0वि0, हरिद्वार, अगस्त-अक्टूबर 2004, पृ0 64-68
49  वैदिक उदात्त चिन्तन वेदवाणी, वैदिक दर्शन विशेषाङ्क, ग्राम रेवली, शाहपुरतुर्क, सोनीपत, नवम्बर 2004, पृ0 88-98,
50  वैदिक उदात्त चिन्तन स्मारिका, आर्य समाज-9 पंचकूला, नवम्बर 2004, पृ0 88-92,
51  ऋग्वेद में यज् धातु का अर्थानुसन्धान, गुरुकुल-शोध-भारती, श्र0वै0 शो0संस्थान, गु0 कां0 वि0 विद्यालय, 2004, पृ0 218-222,
52  वैदिक इन्द्र के विभिन्नार्थ दर्शन, गुरुकुल-शोध भारती, श्र0वै0 शो0संस्थान, गु0 कां0 वि0 विद्यालय, मार्च 2005, पृ0 89-94,
53  महर्षि दयानन्द की दृष्टि में पुरुषार्थ-चिन्तन गुरुकुल पत्रिका, गु0कां0वि0 विश्वविद्यालय, फरवरी-अप्रैल 2005, पृ0 31-39,
54 ऋग्वेद में प्राप्त कतिपय वनस्पतियाँ तथा उनके उपयोग औषधीय पादप संरक्षण, संवर्धन एवं उपयोगिता, सम्पादक-डॉ0 डी0आर0 खन्ना, प्रो0ए0 के0 चोपड़ा प्रकाशक-दयापब्लिशिंग हाउस दिल्ली, पृ0 121-131,
55  वैदिक विद्वान् सामवेद भाष्यकार आचार्य रामनाथ वेदालंकार आर्यजगत्, 24 -30 जून 2005, पृ0 4
56  भारत-राष्ट्र के उच्चतम जीवनादर्शों की अमूल्य सम्पदा वाल्मीकि रामायण, गुरुकुल पत्रिका, गु0कां0वि0 विश्वविद्यालय, मई-जौलाई 2005, पृ0 31-45,
57  निघण्टु पठित ‘ममसत्यम्’ पद का अर्थविचार, वेदवाणी, ग्राम रेवली, शाहपुरतुर्क, सोनीपत, सितम्बर 2005, 15-18,
58  आचार्य पं0 रामप्रसादवेदालंकार, गुरुकुल पत्रिका, गु0कां0 वि0वि0, हरिद्वार, अगस्त-अक्टूबर 2005, पृ0 106-107
59  महर्षि दयानन्द सरस्वती का संस्कृत भाषा का योगदान, गुरुकुल पत्रिका, गु0कां0वि0 विश्वविद्यालय अगस्त-अक्टूबर 2005,
60  महर्षि दयानन्द कृत वेदभाष्य के परिप्रेक्ष्य में न्याय, दण्डं एवं प्रशासन व्यवस्था का स्वरूप गुरुकुल-शोध-भारती, श्र0वै0 शो0संस्थान, गु0 कां0 वि0 विद्यालय, अक्टूबर 2005, पृ0 77-90
61  महर्षि दयानन्द की दृष्टि में नारी, वेदवाणी, वैदिक नारी विशेषाङ्क, ग्राम रेवली, शाहपुरतुर्क, सोनीपत, नवम्बर 2005, पृ0 66-75,
62  महर्षि दयानन्द के वेदभाष्य में प्राप्त परमेश्वर के नाम, स्मारिका, आर्य समाज सैक्टर 9, पंचकूला नवम्बर-दिसम्बर 2005, पृ0 76-90
63  स्वामी दयानन्द सरस्वती, वेदवाणी, ग्राम रेवली, शाहपुरतुर्क, सोनीपत, फरवरी 2006, पृ0 9,
64  वेदों में शिक्षा-विषयक अवधारणा गुरुकुल-शोध-भारती, श्र0वै0 शो0संस्थान, गु0 कां0 वि0 विद्यालय, मार्च 2006, पृ0 56-64,
65  ऋग्वेद में प्राप्त कतिपय वनस्पतियाँ तथा उनके उपयोग, गुरुकुल-पत्रिका, गु0कां0वि0 विश्वविद्यालय, मार्च-मई 2006, पृ0=031-37,
66  वैदिक विद्वान् सामवेद भाष्यकार आचार्य रामनाथ वेदालंकार, परोपकारी, वैदिक यन्त्रालय, अजमेर, जुलाई 2006, पृ0 266-268,
67 महर्षि दयानन्द की दृष्टि में निरोगता के उपाय तथा लाभ, वेदवाणी, ग्राम रेवली, शाहपुरतुर्क, सोनीपत, सितम्बर 2006, पृ0 21-24
68  महर्षि दयानन्द सरस्वती की दृष्टि में वर्णव्यवस्था, वेदवाणी, वर्ण-व्यवस्था विशेषाङ्क, ग्राम रेवली, शाहपुरतुर्क, सोनीपत, नवम्बर 2006, पृ0 118-123,
69  नारी उत्थान के लिए महर्षि दयानन्द का योगदान, स्मारिका, आर्य समाज-9, पंचकूला, 2006, पृ0 175-180,
70  महर्षि दयानन्द कृत वेदभाष्य के परिप्रेक्ष्य में न्याय, दण्ड एवं प्रशासन व्यवस्था का स्वरूप, आन्वीक्षिकी संयुक्ताङ्कः, सन्-2005-2006, सम्पादिका-डॉ0 सविता मोहन, सचिव उत्तरांचल संस्कृत अकादमी, हरिद्वार, पृ0 57-66,
71  ऋग्वेद में प्राप्त कतिपय वनस्पतियाँ तथा उनके उपयोग औषधीय पादप संरक्षण, संवर्धन एवं उपयोगिता, सम्पादक-डॉ0 डी0आर0 खन्ना, प्रो0ए0 के0 चोपड़ा प्रकाशक-दयापब्लिशिंग हाउस दिल्ली, पृ0 121-131, 2006
72  महर्षि दयानन्द सरस्वती के वेदभाष्य में शिल्पविद्याविषयक अवधारणा, गुरुकुल-शोध-भारती, श्र0वै0 शो0 संस्थान, गु0कां0वि0 वि0, हरिद्वार, मार्च 2007, पृ0 45-51,
73 नारी उत्थान के लिये महर्षि दयानन्द सरस्वती का योगदान, गुरुकुल-शोध-भारती, श्र0वै0 शो0संस्थान, गु0 कां0 वि0 विद्यालय, अक्टू0 2007, पृ0 52-59,
74  ऋग्वेद में योगदर्शन का यमांग गुरुकुल-शोध-भारती, श्र0वै0 शो0संस्थान, गु0 कां0 वि0 विद्यालय, मार्च 2008, पृ0 51 से 57,
75  महर्षि दयानन्द की दृष्टि में नारी, गुरुकुल-शोध-भारती, श्र0वै0 शो0संस्थान, गु0 कां0 वि0 विद्यालय, अक्टू0 2008, पृ0 185-194,
76  महर्षि दयानन्द-कृत वेदभाष्य में ‘शिल्पाविद्या’ पद का प्रयोग, गुरुकुल शोध-भारती, श्र0वै0 शो0 संस्थान, गु0 कां0 वि0 विद्यालय, मार्च 2009, पृ0 46-53,
77  स्वामी श्रद्धानन्द सरस्वती, श्रद्धा, वार्षिका विशेषाङ्कः अप्रैल 2009, प्रधान सम्पादक डॉ0 योगेश शास्त्री, प्रकाशक-विद्यालय विभाग, गु0 कां0वि0वि0, हरिद्वार, पृ0 34-35
78  महर्षि दयानन्द की दृष्टि में यानविद्या, वेदवाणी, ग्राम रेवली, शाहपुरतुर्क, सोनीपत, मई 2009, पृ0 21-22,
79  महर्षि दयानन्द की दृष्टि में यानविद्या, गुरुकुल-शोध-भारती, श्र0वै0 शो0संस्थान, गु0कां0 वि0 विद्यालय, सितम्बर 2009, पृ0 31-39
80  महर्षि दयानन्द की दृष्टि में पुरुषार्थ चिन्तन, गुरु शिष्य मिलन स्मारिका, आर्यप्रतिनिधि सभा, मध्यप्रदेश विदर्भ नागपुर महाराष्ट्र, फरवरी 2010, सम्पादक-जयसिंह गायकवाड, पृ0 39-40 तथा 87-89,
81  ऋग्वेद के वनस्पति पद का अर्थ विचार, गुरुकुल शोध भारती, श्र0वै0शो0संस्थान, गु0 कां0 वि0 विद्यालय, मार्च 2010, पृ0 53-64,
82  महर्षि दयानन्द की दृष्टि में अंश धातु का अर्थविचार, गुरुकुल-पत्रिका, इन्टरनेशनल रिसर्च जर्नल ऑफ इण्डोलॉजी, मई-अगस्त 2010, पृ0 191-200,
83  यज्ञ से अनुकूल वर्षा और सुख की प्राप्ति, नभग, सम्पादक-प्रो0आर0 डी0 कौशिक, प्रौद्योगिकी विभाग, गु0का0वि0वि0-अक्टूबर 2010, पृ0 4,
84  महर्षि दयानन्द के वेदभाष्य में धनतथा उसके उपयोग, गुरुकुल-शोध-भारती, श्र0वै0 शो0संस्थान, गु0 कां0 वि0 विद्यालय, अक्टू0 2010, पृ0 116-128,
85  महर्षि दयानन्द के वेदभाष्य में धन तथा उसके उपयोग वेदवाणी, वैदिक अर्थव्यवस्था विशेषाङ्क, ग्राम रेवली, शाहपुरतुर्क, सोनीपत, नवम्बर 2010, पृ0 28-39,
86  धर्म तथा उसकी विभिन्न परिभाषाएं, वेदवाणी, ग्राम रेवली, शाहपुरतुर्क, सोनीपत, दिसम्बर 2010, पृ0 9-11,
87  यजुर्वेद में प्रश्नोत्तर क्रीड़ा तथा उसका महत्त्व गुरुकुल-पत्रिका, इन्टरनेशनल रिसर्च जर्नल ऑफ इण्डोलॉजी, गुरुकुल काङ्गड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार, 2010
88  ऋग्वेद में प्राप्त कतिपय वनस्पतियाँ तथा उनके उपयोग वेद और विज्ञान नामक ग्रन्थ, सम्पादक प्रो0 डी0आर0खन्ना, सन् 2011
89  आचार्य यास्क का पदार्थ चिन्तन गुरुकुल शोध भारती, श्र0वै0शो0संस्थान, गु0 कां0 वि0 विद्यालय, हरिद्वार, सितम्बर 2011
90  वेदों में पर्यावरण चिन्तन गुरुकुल-पत्रिका, इन्टरनेशनल रिसर्च जर्नल ऑफ इण्डोलॉजी, गुरुकुल काङ्गड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार, जनवरी-मार्च 2012
91  वैदिक अश्वविज्ञान गुरुकुल शोध भारती, श्र0वै0शो0संस्थान, गु0 कां0 वि0 विद्यालय, हरिद्वार, मार्च 2012
92  महर्षि दयानन्द सरस्वती की दृष्टि में विष्णु गुरुकुल शोध भारती, श्र0वै0शो0संस्थान, गु0 कां0 वि0 विद्यालय, हरिद्वार

3. डॉ. विजय कुमार त्यागी
शोधनिबन्ध

1. ऋग्वैदिकी योगविद्या (भारतोदय, संस्कृत मासिक पत्रिका, गु.म.वि.ज्वालापुर)

2. ‘श्री हरिसिंह त्यागी’ (स्मारिका- महाविद्यालय के सौ वर्ष, सम्पादक- डॉ. कपिलदेव द्विवेदी) 2007

3. ‘वैश्विक शान्ति में बौद्ध धर्म की महत्ता’ (‘बौधायिनी’ मार्च 2010, गुरुकुल महाविद्यालय ज्वालापुर)

4. ‘गुणों के आधान : आचार्य पण्डित हरिसिंह त्यागी’ (अभिनन्दन ग्रन्थ- ‘भारतीय संस्कृति के पुरोधा आचार्य पं. हरिसिंह त्यागी’) ISBN NO. 978-81-925436-9-7 परिलेख प्रकाशन

5. स्वामी दयानन्दीय राजनैतिक चिन्तन की वैदिक पृष्ठभूमि(शोधपत्र), गुरुकुल शोधप्रभा (त्रैमासिकी शोधपत्रिका- द्वितीय अङ्क जुलाई-सितम्बर 2012), ISSN NO. 2319-8907

(Since - 2005)

Exclusive Online Partner IndiaResults.com