Author Instructions

शोध पत्र विषयक दिशा-निर्देश (Author Instructions)

• गुरुकुल पत्रिका गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय की त्रैमासिक शोध पत्रिका है। यह मार्च, जून, सितम्बर तथा दिसम्बर माह में प्रकाशित की जाती है।

• गुरुकुल पत्रिका में वैदिक एवं लौकिक संस्कृत साहित्य, धर्म, दर्शन, संस्कृति, योग, आयुर्वेद, ज्योतिष, प्राचीन भारतीय इतिहास तथा अन्य प्राच्य विद्या से सम्बन्धित शोध-पत्र प्रकाशन हेतु कभी भी सम्पादक को प्रेषित किये जा सकते हैं।

• अन्धविश्वास को बढ़ावा देने वाले निबन्धों को प्रकाशित करना सम्भव नहीं हो सकेगा, अतः अन्धविश्वास का समर्थन करने वाले निबन्ध कृपया न भेजें।

• गुरुकुल पत्रिका में प्रकाशन हेतु शोध निबन्ध की टंकित मूलप्रति प्रेषित करें, पी॰ डी॰ एफ॰ फ़ाइल, फोटो- स्टेट प्रति स्वीकार्य नहीं होगी। साथ ही हस्तलिखित लेख भी स्वीकार नहीं होंगे। अतः विद्वानों से अनुरोध है कि निबन्ध की मूलप्रति टंकण के उपरान्त शोधन करके लेख प्रेषित करें। जिससे लेख को शुद्धतम रूप में प्रकाशित कराया जा सके।

• शोध निबन्ध में शोध लेखक का निष्कर्ष सुसंगत, प्रामाणिक एवं तथ्यों पर आधारित तथा परम्परा से पोषित होना चाहिए। साथ ही उनमें अपने कथन या निष्कर्ष को पुष्ट करने के लिए न्यूनतम २० प्रमाण देने आवश्यक हैं।

• मनीषी विद्वानों से आग्रह है कि वे अपना निबन्ध माइक्रोसॉफ़्ट वर्ड डॉक्यूमेंट में टाइप करायें और पाद टिप्पणी (फुटनोट) को डालने के लिए superscript का प्रयोग न कर उसे ALT+CTRL+F के माध्यम से डालें। इस प्रकार फुटनोट डालने में त्रुटि की संभावना नहीं रहती है।

• टंकण कराते समय यह ध्यान रखना अपेक्षित है की निबन्ध माइक्रोसॉफ़्ट वर्ड डॉक्यूमेंट (A-4 साइज़) में यूनिकोड फॉन्ट (Kokila) साइज 14 में टाइप कराया जाए। टंकण के उपरान्त, शोधन करके ई-मेल से प्रेषित करें। ई-मेल का पता निम्न है : gurukulapatrika@gmail.com मो0 नं0- 09897273663, 07300761267

• ईमेल के साथ- साथ लेखक को अपने शोध पत्र की हार्ड कॉपी प्रेषित करना भी आवश्यक है, जिससे मूल्याङ्कन के लिए शोध लेख प्रेषित किया जा सके।

• शोध पत्र प्रेषण के साथ इस आशय का प्रमाण पत्र भी प्रेषित करें कि यह लेखक का अपना स्वयं का मौलिक कार्य है। इसमें दी गई सामग्री के प्रति मेरा पूर्ण उत्तरदायित्व है। यह शोध पत्र अन्यत्र प्रकाशनार्थ नहीं भेजा गया है। शोध पत्र से संबन्धित भविष्य में किसी प्रकार के होने वाले वाद-विवाद के लिए मैं पूरी तरह जिम्मेदार हूँ। साथ ही लेखक द्वारा अपना दूरभाष न॰, ई-मेल तथा पत्र व्यवहार का पूर्ण पता लिखा जाना अनिवार्य है।

प्रो0 सोहनपाल सिंह आर्य
संपादक

(Since - 2005)

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