गुरुकुल शोधभारती

गुरुकुल-शोध-भारती का उद्देश्य एवं लक्ष्य :
गुरुकुल-शोध-भारती (ISSN- 0974-8830) गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय की षाण्मासिक शोध पत्रिका है। यह प्रमुख रूप से वेद, वैदिक, एवं लौकिक साहित्य, धर्म, दर्शन, संस्कृति, योग, आयुर्वेद, तथा अन्य प्राच्यविद्या से सम्बन्धित शोधपरक आलेखों को प्रकाशित करने के लिए कृतसंकल्प है। यह प्राच्यविद्याओं में  निहित ज्ञान-विज्ञान एवं साहित्यिक मौलिक अनुसन्धानों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। अनुसन्धान के क्षेत्र में हिन्दी, संस्कृत एवं अंग्रेजी भाषाओं  में प्रकाशित होने वाली स्तरीय शोध पत्रिका है।

सम्पादक मण्डल:

मुख्य सरंक्षक
प्रोफेसर रामप्रकाश, कुलाधिपति, गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार (उत्तराखण्ड)
सरंक्षक
प्रोफेसर सुरेन्द्र कुमार, कुलपति, गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार (उत्तराखण्ड)
सम्पादक
प्रोफेसर ज्ञान प्रकाश शास्त्री, प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, श्रद्धानन्द वैदिक शोध-संस्थान, गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार (उत्तराखण्ड)
प्रकाशक
प्रोफेसर विनोद कुमार, कुलसचिव, गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार (उत्तराखण्ड)

पुनर्विलोकन समिति:
१. प्रो॰ राधेश्याम चतुर्वेदी, पूर्व अध्यक्ष, बनारस हिन्दु  विश्वविद्यालय, वाराणसी
२. डॉ॰ महेंद्र कुमार मिश्र, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़
३. प्रो॰ केशव नारायण विद्यालंकार,  संस्कृत विभाग, उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद
४. प्रो॰ बलवीर सिंह आचार्य, पूर्व अध्यक्ष संस्कृत विभाग, महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय, रोहतक (हरियाणा)
५. प्रो॰ कमलेश चौकसी, गुजरात विश्वविद्यालय, अहमदाबाद (गुजरात)
परीक्षकत्व (Peer-Review)-
            प्राप्त शोधपत्रों को दो बाह्य परीक्षकों के पास मूल्याङ्कन हेतु प्रेषित किया जाता है तथा उनके द्वारा निर्दिष्ट संशोधनों को आधार बनाकर प्रकाशित किया जाता है।
शोध लेख विषयक दिशा-निर्देश:

  • गुरुकुल-शोध-भारती में शोधपत्र मूल्याङ्कन कराने के पश्चात् प्रकाशित कराये जाते हैं। अतः  विद्वान् लेखकों से अनुरोध है कि वे वही शोधपत्र इस पत्रिका के लिए प्रेषित करें, जो सब प्रकार से शोध की कसौटी पर खरे हों।
  • शोध निबन्ध मौलिक होना चाहिए किसी अन्य विद्वान् की पुस्तक अथवा निबन्ध की नकल करके शोधपत्र भेजना बौद्धिक अपराध तथा अपनी प्रतिभा का हनन है।
  • गुरुकुल-शोध-भारती में केवल शोध निबन्ध ही प्रकाशित किए जाते हैं। जिनमें शोध-प्राविधि का प्रयोग नहीं किया गया है, ऐसे लेखों को प्रकाशित करना सम्भव नहीं होगा।
  • किसी अन्य पत्रिका में पूर्व प्रकाशित निबन्ध को पुनः प्रकाशित करने के लिए न भेजें।
  • अन्धविश्वास को बढ़ावा देने बाले निबन्धों को प्रकाशित करना सम्भव नहीं हो सकेगा, अतः अन्धविश्वास का समर्थन करने वाले निबन्ध कृपया न भेजें।
  • गुरुकुल शोध भारती में प्रकाशन हेतु शोध निबन्ध की मूलप्रति प्रेषित करें, फोटो- स्टेट प्रति स्वीकार्य नहीं होगी। साथ ही हस्तलिखित लेख भी स्वीकार नहीं होंगे। अतः विद्वानों से अनुरोध है की निबन्ध की मूलप्रति टंकण के उपरांत शोधन करके लेख प्रेषित करें। जिससे लेख को शुद्धतम रूप में प्रकाशित कराया जा सके।
  • शोध निबन्ध में शोध लेखक का निष्कर्ष सुसंगत, प्रामाणिक एवं तथ्यों पर आधारित तथा परम्परा से पोषित होना चाहिए। साथ ही उनमें अपने कथन या निष्कर्ष को पुष्ट करने के लिए न्यूनतम 15 से अधिक प्रमाण देने चाहिए।
  • अधिक उचित होगा की आप अपना निबन्ध माइक्रोसॉफ़्ट वर्ड डॉक्यूमेंट में टाइप करायें और फुटनोट ALT+CTRL+F के माध्यम से डालें। इस प्रकार फुटनोट डालने में त्रुटि की संभावना नहीं रहती है। यदि उक्त उपाय अपनाना सम्भव न हो तो फुटनोट के अन्त में दें, जिससे उनको यथा स्थान प्रस्तुत किया जा सके।
  • टंकण कराते समय यह ध्यान रखना अपेक्षित है की निबन्ध कृतिदेव 10 अथवा वॉकमेन चाणक्य के साइज 14 में टाइप कराया जाए। टंकण के उपरान्त, शोधन करके सी॰ डी॰ अथवा ईमेल से प्रेषित करें।
  • विद्वान् ईमेल से भी अपने अपने निबन्ध प्रेषित कर सकते हैं। ईमेल का पता है-

gyanprakashshastri@gmail.com

  • सी॰ डी॰ अथवा ईमेल के साथ- साथ लेखक को अपने शोधलेख की हार्ड कॉपी प्रेषित करना भी आवश्यक है, जिससे मूल्याङ्कन के लिए शोध लेख प्रेषित किया जा सके।

 

सम्पर्क सूत्र-
प्रोफेसर ज्ञानप्रकाश शास्त्री, प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, श्रद्धानन्द वैदिक शोध-संस्थान, गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार (उत्तराखण्ड)
ई मेल- gyanprakashshastri@gmail.com  

 

 

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