शोध लेख विषयक दिशा-निर्देश

शोध लेख विषयक दिशा-निर्देश

गुरुकुल-शोध-भारती में शोधपत्र मूल्याङ्कन कराने के पश्चात् प्रकाशित कराये जाते हैं। अतः विद्वान् लेखकों से अनुरोध है कि वे वही शोधपत्र इस पत्रिका के लिए प्रेषित करें, जो सब प्रकार से शोध की कसौटी पर खरे हों।
• शोध निबन्ध मौलिक होना चाहिए किसी अन्य विद्वान् की पुस्तक अथवा निबन्ध की नकल करके शोधपत्र भेजना बौद्धिक अपराध तथा अपनी प्रतिभा का हनन है।
• गुरुकुल-शोध-भारती में केवल शोध निबन्ध ही प्रकाशित किए जाते हैं। जिनमें शोध-प्राविधि का प्रयोग नहीं किया गया है, ऐसे लेखों को प्रकाशित करना सम्भव नहीं होगा।
• किसी अन्य पत्रिका में पूर्व प्रकाशित निबन्ध को पुनः प्रकाशित करने के लिए न भेजें।
• अन्धविश्वास को बढ़ावा देने बाले निबन्धों को प्रकाशित करना सम्भव नहीं हो सकेगा, अतः अन्धविश्वास का समर्थन करने वाले निबन्ध कृपया न भेजें।
• गुरुकुल शोध भारती में प्रकाशन हेतु शोध निबन्ध की मूलप्रति प्रेषित करें, फोटो- स्टेट प्रति स्वीकार्य नहीं होगी। साथ ही हस्तलिखित लेख भी स्वीकार नहीं होंगे। अतः विद्वानों से अनुरोध है की निबन्ध की मूलप्रति टंकण के उपरांत शोधन करके लेख प्रेषित करें। जिससे लेख को शुद्धतम रूप में प्रकाशित कराया जा सके।
• शोध निबन्ध में शोध लेखक का निष्कर्ष सुसंगत, प्रामाणिक एवं तथ्यों पर आधारित तथा परम्परा से पोषित होना चाहिए। साथ ही उनमें अपने कथन या निष्कर्ष को पुष्ट करने के लिए न्यूनतम 15 से अधिक प्रमाण देने चाहिए।
• अधिक उचित होगा की आप अपना निबन्ध माइक्रोसॉफ़्ट वर्ड डॉक्यूमेंट में टाइप करायें और फुटनोट ALT+CTRL+F के माध्यम से डालें। इस प्रकार फुटनोट डालने में त्रुटि की संभावना नहीं रहती है। यदि उक्त उपाय अपनाना सम्भव न हो तो फुटनोट के अन्त में दें, जिससे उनको यथा स्थान प्रस्तुत किया जा सके।
• टंकण कराते समय यह ध्यान रखना अपेक्षित है की निबन्ध कृतिदेव 10 अथवा वॉकमेन चाणक्य के साइज 14 में टाइप कराया जाए। टंकण के उपरान्त, शोधन करके सी॰ डी॰ अथवा ईमेल से प्रेषित करें।
• विद्वान् ईमेल से भी अपने अपने निबन्ध प्रेषित कर सकते हैं। ईमेल का पता है-
gyanprakashshastri@gmail.com
• सी॰ डी॰ अथवा ईमेल के साथ- साथ लेखक को अपने शोधलेख की हार्ड कॉपी प्रेषित करना भी आवश्यक है, जिससे मूल्याङ्कन के लिए शोध लेख प्रेषित किया जा सके।

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